Shaurya News India
इस खबर को शेयर करें:

डीडीयू नगर: संस्कृति संजीवनी सेवा संस्थान के तत्वावधान मे शुक्रवार शोभायात्रा के साथ सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। स्थानीय कालीमहाल स्थित श्री काली मंदिर प्रांगण से शोभायात्रा प्रारंभ होकर शाहकुटी श्रीकाली मंदिर के समीप स्थित कथा पंडाल पहुंच कर समाप्त हुयी। मौके पर श्रद्धालु तुलसी वृक्ष लेकर कथा स्थल पहुंचे जहां माता काली के पूजन पश्चात पुराण पूजा प्रारंभ हुयी।अपराह्न काल प्रथम दिवस कथा के दौरान व्यासपीठ से उद्बोधन देते हुए श्रीमद् भागवत् व मानस मर्मज्ञ अखिलानन्द जी महाराज ने भक्त को भगवान से जुड़ने के लिए भक्ति मार्ग की व्याख्या  की।

 

उन्होने कहा कि भवसागर तैरने के लिए, प्रभु से युक्त होने के लिए दो मार्ग मुख्य है। एक है ज्ञान मार्ग तो दूसरा है कर्म मार्ग। ज्ञानमार्ग सांख्य का मार्ग है तो कर्ममार्ग यथार्थ योगमार्ग। ज्ञान मार्ग हो या कर्म मार्ग, दोनों में भक्ति की परम आवश्यकता है। भक्ति दोनों के साथ होनी चाहिये। ज्ञान के साथ-साथ अगर भक्ति नहीं होगी तो ज्ञान का अभिमान आयेगा । ज्ञान मुक्त करता है, मगर ज्ञान का अभिमान बाँधता है। पूर्ण वैराग्य के बिना ज्ञानमार्ग में सिद्धि नहीं मिलती। कर्ममार्ग राजपथ है। हर कोई उस पथ पर चलकर जा सकता है। कर्म में अगर भक्ति होगी तो कर्म पूजा बनेगा।

 

बोलने में भक्ति होगी तो बोलना स्तुति बनेगा। देखनें में भक्ति होगी तो दर्शन बनता है। चलने में भक्ति मिलने से चलना परिक्रमा बन जाता है। भोजन में भक्ति मिलने से भोजन यज्ञ बन जाता है। सोने में भक्ति मिलने से वह समाधि बन जाती है। तुम जो भी क्रिया करो उसमें भक्ति घुल जानी चाहिये।ज्ञान व वैराग्य के द्वारा भक्ति पुष्ट होती है ईश्वर प्राप्ति के तीन मार्ग हैं कर्म ज्ञान और भक्ति जिसमे भक्ति को श्रेष्ठ माना गया है।

 

मुख्य यजमान के रूप मे शैलेश तिवारी ,ममता तिवारी,यज्ञ नारायण सिंह,पूनम सिंह रहे । शोभायात्रा मे मुख्य रूप से उपेन्द्र सिंह पी एन सिंह राजेश जायसवाल, रामजी गुप्ता संजय अग्रवाल, शैलेश तिवारी, वी के पांडेय, बृजेश सिंह,राजेश तिवारी, संजय तिवारी,गुड्डू तिवारी, वैभव तिवारी, नीलम सिन्हा,लालमणि देवी, संतोष पाठक,आलोक पांडेय सहित सैकड़ों महिला पुरूष सम्मिलित रहे।

इस खबर को शेयर करें: